TAQBIR-E-TEHRIMA KE WAQT KAANO TAK HAATH UTHANA (तकबीरे तहरीमा के वक़्त कानों तक हाथ उठाना)
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"नमाज़ में तक्बीरे तहरीमा के वक़्त मर्दों का कानो तक हाथ उठाना सुन्नत है जबकि गैर मुक़ल्लिद औरतों की तरह अंगूठे से कंधे छू कर ही हाथ बांध लेते हैं|"
➤हदीस - हज़रत मालिक बिन हवीरस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि रसूले करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम जब तकबीर कहते तो अपने हाथों को बुलंद करते यहां तक कि वो कानों के बराबर हो जाते|
📕 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 168
📕 निसाई,जिल्द 1,सफह 102
📕 इब्ने माजा,सफह 62
➤हदीस - हज़रत वायल बिन हजर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं मैंने देखा कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम नमाज़ शुरू करते वक़्त अपने हाथों को कानों तक उठाते थे|
📕 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 173
📕 मुसनद इमामे आज़म,सफह 86
📕 ज़जाजतुल मसाबीह,जिल्द 1,सफह 569
NOTE- इसी हदीस को निसाई तिब्रानी दारक़ुतनी और बैहक़ी ने भी रिवायत किया है|
➤हदीस - हज़रत अब्दुल जब्बार बिन वायल रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि मेरे वालिद ने देखा कि सरकारे दोआलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम जब नमाज़ शुरू फरमाते तो अपने दोनों हाथ इस क़दर बुलंद करते कि आप के हाथों के अंगूठे कानो के मुक़ाबिल हो जाते|
📕 निसाई,जिल्द 1,सफह 102
📕 अबु दाऊद,जिल्द 1,सफह 104
📕 बैहक़ी,जिल्द 2,सफह 25
➤हदीस - इमाम हाक़िम ने हज़रत अनस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से इसी तरह रिवायत की और फरमाया कि इस हदीस की सनद सही है और ये बुखारी व मुस्लिम की शर्त के मुताबिक है और इसमें कुछ ज़ोअफ नहीं है|
📕 अलमुस्तदरक,जिल्द 1,226
📕 दारक़ुतनी,जिल्द 1,सफह 345
➤हदीस - हज़रत वायल रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि जब तुम नमाज़ अदा करो तो हाथों को कानों के बराबर करो और औरतों को चाहिये कि वो हाथों को सीने के बराबर करें|
📕 तिब्रानी,जिल्द 22,सफह 18
➤फुक़्हा :
ये तो सिर्फ चंद हदीसें हैं जिनसे कानों तक हाथ उठाना साबित होता है वरना किताबों में तो और भी बहुत सारी ज़िक्र है मगर इसके बार खिलाफ गैर मुक़ल्लिद बुखारी व मुस्लिम शरीफ की दो हदीसों को पेश करता है जिसका मफहूम कुछ इस तरह है हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम जब तक्बीर फरमाते थे तो अपने हाथ शरीफ कांधो के मुक़ाबिल करते थे तो अर्ज़ ये है कि ये हदीस कहीं से भी हनफियों के खिलाफ नहीं क्योंकि अंगूठों का कानों तक लगने में हाथ यक़ीनन कांधो तक ही होगा और इस तरह दोनों तरह की हदीसों पर अमल हो जायेगा जबकि अगर अंगूठे को कांधो से मिलायेंगे तो बहुत सारी हदीसों का इनकार लाज़िम आयेगा जैसा कि अबु दाऊद शरीफ की एक हदीस में सराहतन ज़िक्र हुआ है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हाथ मुबारक उठाये यहां तक कि हाथ शरीफ कांधों के और अंगूठे मुबारक कानों के मुक़ाबिल हो गये कुछ कम्बख्त क़ुर्आनो हदीस तो पढ़ लेते हैं मगर उसे समझने से क़ासिर रह जाते हैं,जिन जिन हदीसों में कांधों का ज़िक्र आया है वहां हाथ मज़कूर है और जहां कानों का ज़िक्र है वहां अंगूठा फरमाया गया है लिहाज़ा अब अगर किसी गैर मुक़ल्लिद के अन्दर दम है तो एक ऐसी हदीस पेश करके दिखा दे जिसमे ये सराहतन ज़िक्र हुआ हो कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अपने अंगूठे कांधो के मुक़ाबिल करते थे,मगर वो हरगिज़ ऐसा ना कर सकेंगे|
📕 जाअल हक़,हिस्सा 2,सफह 10-14
"Namaz me takbeere tahreema ke waqt mardon ka kaano tak haath uthaana sunnat hai jabki gair muqallid aurton ki tarah anguthe se kandhe chhu kar hi haath baandh lete hain."
➤HADEES - Hazrat Maalik bin hawiras raziyallahu taala anhu farmate hain ki Rasoole kareem sallallahu taala alaihi wasallam jab takbeer kahte to apne haathon ko buland karte yahan tak ki wo kaano ke barabar ho jaate.
📕 Muslim,jild 1,safah 168
📕 Nisayi,jild 1,safah 102
📕 Ibne maaja,safah 62
➤HADEES - Hazrat waayal bin hajar raziyallahu taala anhu farmate hain maine dekha ki Rasoole ALLAH sallallahu taala alaihi wasallam namaz shuru karte waqt apne haathon ko kaano tak uthate the.
📕 Muslim,jild 1,safah 173
📕 Musnad imame aazam,safah 86
📕 Zajajatul masabih,jild 1,safah 569
NOTE- Isi hadees ko Nisayi Tibrani Daarqutni aur Baihaqi ne bhi riwayat kiya hai.
➤HADEES - Hazrat abdul jabbar bin waayal raziyallahu taala anhu farmate hain ki mere waalid ne dekha ki sarkare do aalam sallallahu taala alaihi wasallam jab namaz shuru farmate to apne dono haath is qadar buland karte ki aap ke haathon ke anguthe kaano ke muqaabil ho jaate.
📕 Nisayi,jild 1,safah 102
📕 Abu daood,jild 1,safah 104
📕 Baihaqi,jild 2,safah 25
➤HADEES - Imaam haakim ne hazrat anas raziyallahu taala anhu se isi tarah riwayat ki aur farmaya ki is hadees ki sanad sahi hai aur ye bukhari wa muslim ki shart ke mutabiq hai aur isme kuchh zoaf nahin hai.
📕 Almustadrak,jild 1,226
📕 Daarqutni,jild 1,safah 345
➤HADEES - Hazrat waayal raziyallahu taala anhu se marwi hai ki Rasoole ALLAH sallallahu taala alaihi wasallam farmate hain ki jab tum namaz ada karo to haatho ko kaano ke barabar karo aur aurton ko chahiye ki wo haathon ko seene ke barabar karen.
📕 Tibrani,jild 22,safah 18
FUQHA
📕 Ja'al haq,hissa 2,safah 10-14
Assalamualaikum
ReplyDeleteAssalamualaikum
Sharait me
Takbeer ko takbeer e tehreema kyu kaha jata hai ?